तुझे याद है भाई |

तुझे याद है भाई, नानी के घर क पीछे जो बाग़ था,
हम अमियां चुराया करते थे;
कुंए में पथ्थर फेकते,
उसमे नाम चिल्लाया करते थे|

कितने सारे सबक तो हमने,
अमरुद की डाली पर लटककर सीखे थे;
और छोटे छोटे करोंदे खट्टे होते हैं,
जाना जब हमने खुद चीखे थे|

पपीते से थोड़ी काम बनती थी,
कभी हाँथ ही नहीं आया,
शायद उसे हमसे थोड़ा काम प्यार था;
केला तो दोस्त था अपना,
हमेशा पेट भरने को तय्यार था|

अरे मैं वो झूला कैसे भूल गई
जो पापा के स्कूटर क टायर से बनाया था,
कहीं जगह ही ना समझी,
इसलिए बाग़ क दरवाजे पर लटकाया था|

पर भाई अब ना वो झूला है ना ही पेड़ हैं,
कहते हैं मल्टी स्टोरी है , हमारे लिए तो मिटटी का ढेर हैं;
बारिश की सोंधी खुशबू, आम क पेड़ की छाओं की जगह कोई ले पायेगा,
और ऐ सी का १६ डिग्री मन को वो ठंडक दे पायेगा?

पर सिर्फ वो बाग़ नहीं भाई जो खो गया है,
मेरे बचपन का साथी मेरा दोस्त भी मुझसे दूर हो गया है;
मैं ढूंढ़ती हूँ आज भी तुम्हे आइस क्रीम खाने को,
चाट की दुकाम पर जाने को;

मैगी के लिए मुझसे अब कोई नहीं लड़ता,
कितना भी छुपा लूँ, डायरी ढूंढ ढूंढ़कर कोई नहीं पड़ता;
मेरा मन शायद अभी भी उसी बाग़ मेँ रुका है,
और तू मेरे बुद्धू भाई कहीं लैपटॉप क पीछे छुपा है|

कुछ दिन मे मैं अपने हाँ अपने घर चली जाउंगी,
तू कितना भी बुलाएगा दिवाली पर तेरे घर नहीं आउंगी,
पर भाई चल न, एक बार फिर से शैतानी करते हैं,
बाग़ से बेर तोड़कर जीबों मे भरते हैं|

एक बार फिर से दौड़ते हैं, घर आकर अपनी कहानियां सबको सुनाएंगे,
और जब पडोसी शिकायत करेंगे तो फिर भागकर तू माँ के मे पापा के पीछे छिप जायेंगे|
तुतलाकर तू जो भी मांगता था वो सारी टाफियां खिलाऊंगी,
बस तू हाँ कर दे भाई मे बचपन की रेत मुठ्ठी मे भर लाऊंगी|



Comments

Popular posts from this blog

Be kind to others, it will pay off...

Chocolate and Me...

Ever since I woke up, I have been judged...