Tuesday, 17 December 2013

From my crying pen #5...



लफ्ज़ हमारे पास होते,
तो बता पाते;
आप क्या हैं हमारे लिए, 
ये दिखा पाते;
वैसे तो लोग कई मिले,
हमे ज़िन्दगी के सफ़र में; 
आप ना आते तो शायद, 
किसी मोड़ पर ठहर जाते… 

हमसे यूँही पूछते ,
तो हम बताते ;
ऐतवार कितना है आप पर,
ये सुनाते;
फिर भी इस बात का इल्म,
आपको होने ना देते;
के आप ना आते तो शायद ,
हम बिखर जाते… 

इस काबिल ही कहाँ थे हम,
जो आपको पाते;
हर दिन आपसे शुरू करते,
हर रात आपमें सिमट जाते;
बिना आपके हर पन्ना खाली है,
ज़िन्दगी का मेरी;
सिर्फ ये बात आप समझते,
तो शायद हम आज भी मुस्कुराते … 

एक इशारा तो करते,
आपके हो जाते;
अलफ़ाज़ ज़रूरी न थे,
हम यूँही समझ जाते;
आपने रोका नहीं इसमे,
खता हमारी क्या है?
आप रोकते तो सही,
हम सारी उम्र रुक जाते… 

2 comments:

  1. आपने रोका नहीं इसमे,
    खता हमारी क्या है?

    बहुत खूब, बेहद खूबसूरत रचना

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  2. Advanced Merry Christmas & Happy New Year greetings and also Thanks and Smiles:) for ur support till now Dear Blogger Buddy God<3U:)

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