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From my crying pen #1...




Zindagi k panno me humne,
Khata-e-mohobbat na likhi hoti...
To aaj mahil me muskurane ka maza,
Kuch or hi hota...

Tujhe hi khuda banakar,
Ibaadat na ki hoti...
To us khuda ki inayat par bharosa,
Kuch or hi hota...

Lamho k in darakhton se,
Shikayat na ki hoti...
To bina shav bahe so jane ka maza ,
Kuch or hi hota...

Tere har waade ko,
Is dil me panah na di hoti...
To isme khwab sazane ka maza,
Kuch or hi hota...

Har jhoot ko tere sach mankar,
tabbju na di hoti...
To paak dilo ki sachchai par bharosa,
Kuch or hi hota...

Shikayat tujhse nahi,meri takdeer se hai,
Bas isne bewafaai na ki hoti...
To dhadkano k dhadkane ka maza,
Kuch or hi hota...

Thanks for reading.. :)

Comments

  1. I loved it...I don't have words to say something or anything...

    And as your first attempt it is simply beautiful :)

    Lovely!

    Take Care

    ReplyDelete

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