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Is 'Reservation' really working..???

I am fed off reading news about reservation,in one part of the country some are en-devouring to upgrade it in the meanwhile some other are trying to remove it from roots.

Do you really think its working? In 21st century where everyone is well aware of what they should do to get a healthy and prosper future even if the person belongs to sc/st/obc or general. Quota doesn't tell them that you should save water or should not contribute to air pollution. We all are familiar with the pro and cons of this reservation system.

In my opinion this reservation is responsible for dividing our country on the basis of religion, on the basis of caste, and on the basis of low and high in society.

We don't need any quota to upgrade the condition of are brothers and sisters,we need understanding that our country need all of us to rise and wall together. I am not saying that it was not required, yes it was. But today it has taken a face of termites who are making our country's soul paralyzed.


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बचपन की पोटरी: किसी की मुस्कुराहटों...!

बात उन दिनों की है जब मैं तीसरी क्लास में थी और भाई दूसरी | हमे स्कूल बस पकड़ने के लिए करीब 200 मीटर चलकर गली से बाहर आना पड़ता था | ज्यादातर मैं और भाई अकेले ही चले जाते थे, पर कोशिश रोज़ होती के पापा हमे छोड़ने आये | कारण था नया नया स्टेट बैंक का एटीएम | याद है पहले हमे उसके अंदर जाने के लिए भी कार्ड स्वाइप करना होता था | जब तक बस नहीं आती हम उसी एटीएम के कमरे में घुस जाते और ऐसे रहते जैसे उन 5-10 मिनट के लिए हम उसके मालिक हों | कभी उसके केमेरे में देखकर अजीब अजीब शकल बनाते और कभी पूरे भारत में एस बी आई एटीएम की लोकेशंस प्रिंट आउट निकाल कर बैग में भर लेते | जब पापा उसमे कार्ड डालते तो राजाओं की तरह उसे पैसे निकालने का आदेश देते | कभी जब खेलने का मन नहीं होता तो हम बस कांच से बहार की दुनिया देखते रहते | जैसे हमारे लिए सब नया हो, जैसे हमे इस दुनिया के हैं ही नहीं | सुबह के सात बजे हमे हमारे छोटे से 5 मिनट के महल में कोई परेशान करने नहीं आता | हाँ महल | वरना ए सी की ठंडी हवा और कहाँ खाने मिलेगी, वो भी मुफ्त !

एक दिन सुबह बहुत ज़ोरों की बारिश हो रही थी | पापा को पिछली शाम बारिश में भीगकर घर…

मेरे पानी वाले बाबा... !

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Chocolate and Me...

This post has been published by me as a part of the Blog-a-Ton 53; the fifty-third edition of the online marathon of Bloggers; where we decide and we write. In association with ​Soulmates: Love without ownership by Vinit K Bansal. To be part of the next edition, visit and start following Blog-a-Ton.
One fine morning, when the sun was bright; I was craving for chocolate, straight from night. I ran to my mother, jumped and gave her kiss, She gave me my chocolate as she promised. I was holding it tight, like the rat in eagle’s claw, Enjoying it thoroughly which my brother had saw. He came with a report card, pretending to whine, Said he’ll give me a bigger one, if I got it signed. I made my way toward the terrace for solace, After giving him my best ‘Do you think I’m stupid face’? I wave a pretentious hello to my despicable neighbor, Smiling at him, is itself a big favor. Besides failing a hundred times, he offered this time straight, ‘I’ll shower you with chocolate if you’ll agree for …